धर्म

जमीन से प्रकट हुए भगवान सुख समृद्धि का देते वरदान , जमीन से निकले हैं यहां बप्पा, आस्था ऐसी कि बालोद जिले के साथ साथ अन्य प्रदेश से सूनी गोद भरवाने मुराद लेकर पहुंचते हैं लोग

बालोद। नगर के मरार पारा में स्थित गणपति का मंदिर दिनोंदिन विख्यात होता जा रहा है। इसकी ख्याति सिर्फ बालोद शहर और ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूसरे जिलों तक भी पहुंचने लगी है। दूसरे जिले से भी लोग गणपति महाराज को अपनी व्यथा सुनाने के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहां सुनी गोद हरी हो जाती है।

बालोद शहर में यह एक ऐसा प्राचीन गणेश मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से लोगों की सूनी गोद भर जाती है। बालोद जिला मुख्यालय के मरारपारा (गणेश वार्ड) में जमीन के भीतर से प्रगट हुए सौ साल पुराने स्वयंभू गणेश मंदिर में नि:संतान महिलाएं बच्चे की आस लेकर आते हैं। लोगों में ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान गणेश सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले नि:संतान दंपती को संतान प्राप्ति का सुख देते हैं, औऱ साथ ही हर मनोकामना को पूरा करते हैं गणेश ,यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के अलावा सालभर भक्तों का यहां तांता लगा रहता है। जमीन से निकले स्वयं-भू भगवान गणपति के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा बढ़ती जा रही है। सबसे पहले दो लोगों ने मूर्ति स्थापित कर पूजा की शुरुआत की थी। इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। गणेश चतुर्थी के 11 दिनों के अलावा बप्पा के वार बुधवार को भी महाआरती होती है।

मोरिया मंडल परिवार कर रहे गणपति सेवा

इस मंदिर से 2006 से महिला, पुरुष व युवक-युवतियों की टोली बनी है। जिसे मोरिया मंडल परिवार नाम दिया गया है। मंडल के सदस्यों के साथ लोग भी गणेश की सेवा व पूजा-अर्चना करते हैं। जमीन से प्रकट हुए भगवान गणेश का यह इस मंदिर समिति में 70 सदस्य प्रमुख हैं। साथ मंदिर से जुड़े और कई लोग हैं, जो मंदिर में गणेश चतुर्थी के अलावा अन्य प्रमुख पर्व पर यहां महाप्रसादी, हर बुधवार को महाआरती का आयोजन करते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त भी भगवान गणेश के दर्शन व उनकी पूजा करने आते है।

अभी भी जमीन पर के अंदर है मूर्ति का कुछ हिस्सा

स्वयं-भू श्री गणेश के घुटने तक का कुछ हिस्सा अभी भी जमीन के भीतर है। लोग बताते हैं कि पहले गणेश का आकार काफी छोटा था, लेकिन धीरे धीरे बढ़ता गया। आज बप्पा विशाल स्वरूप में हैं। गणपति का आकार लगातार बढ़ता देख भक्तों ने वहां पर मंदिर बनाया है। मंदिर में दूरदराज के लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस स्वयंभू गणेश की पूजा कर मनोकामना मांगते हैं, वह पूरी भी होती है।

लगभग सौ साल पहले प्रगट हुए थे गणेश

मंदिर के सदस्य व पार्षद सुनील जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय के मरारापारा (गणेश वार्ड) में लगभग 100 साल पहले जमीन के भीतर से भगवान गणेश प्रगट हुए। सबसे पहले स्व. सुल्तानमल बाफना और भोमराज श्रीमाल की नजर पड़ी। पहले बाफना परिवार के किसी सदस्य के सपने में बप्पा आए थे। इसके बाद लोगों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का विस्तार होता गया। इन दोनों के निधन के बाद से उनका परिवार व मोरिया मंडल परिवार के सदस्य पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। मान्यता ये भी है कि बाफना परिवार के किसी सदस्य के सपने में बप्पा आए थे। 70 सालों से बाफना परिवार के सदस्य मंदिर में पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। मरारपारा में बप्पा का छोटा सा मंदिर है। लेकिन उसके प्रति लोगों की आस्था अटूट है। समय के साथ अब मंदिर का निर्माण बड़े स्तर पर हो चुका है। पहले तो केवल दो चार लोग ही बप्पा की सेवा और पूजा अर्चना करते थे। लेकिन 2006 से नगर में लोगों की टोली बनी जिसे मोरिया मंडल परिवार नाम दिया गया। अब मोरिया मंडल परिवार के सदस्यों के साथ नगर के लोग भी गणेशजी की पूजा करते हैं। वार्ड आठ के पार्षद सुनील रतन बोहरा ने बताया कि प्रत्येक बुधवार को शाम साढ़े सात बजे महाआरती व विशेष भोग प्रसाद भगवान को चढ़ाया जाता है।

पुण्य ऐसा भी

प्रति दिन नगर के चौक चौराहों में भटक रहे 10 लोगों को भोजन खिलाते हैं। इस सेवाकार्य में अरुण बाफना, संजय शर्मा, लक्की चांडक, देवलाल ठाकुर, नेमबाई ठाकुर, सुनीता यादव, सीमा निषाद, उर्वशी निषाद, संतोषी, मिथिला, रोहिणी ठाकुर, मनीष शर्मा, चेतन शर्मा,गोमती, महेंद्र ,का विशेष योगदान रहता है।

गणेश चतुर्थी में 11 दिनों तक चलता है उत्सव

पूरे वर्ष भर इस मंदिर में भक्तों का आना जाना लगा रहता है। 11 दिनों तक चलने वाले गणेश चतुर्थी के पर्व में दीपावली जैसा माहौल रहता है। गणेश चतुर्थी के पखवाड़े भर पहले तैयारी शुरू कर दी जाती है। 11 दिनों तक शाम 7.30 बजे गाजे बाजे के साथ पूजा की जाती है। जिसमें सैंकड़ों की संख्या में भक्त उपस्थित होते हैं। 11 दिनों तक अलग-अलग तरह के भोग लगाए जाते हैं।

2006 से मोरिया मंडल परिवार कर रहा है बप्पा की सेवा

मंदिर में सेवा करने के लिए वर्ष 2006 में मोरिया मंडल परिवार का गठन एक टोली के रूप में हुई थी। उस समय कुछ सदस्य ही इससे जुड़े थे। लेकिन अब इस मंडल में कई नए सदस्य जुड़ते जा रहे है और अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कोरोना काल से शुरू हुई विशेष पहल

कोरोना काल में जब कई लोगों का रोजगार छिन गया था और घर में खाने के लिए दाना नहीं था. तब मोरिया मंडल परिवार ने एक पहल की और गणेश मंदिर के पास ही गणेश प्रसादी की शुरुआत की. बीते वर्ष गणेश चतुर्थी के पहले दिन से ही गरीबों को निशुल्क भोजन देने के साथ ही जो लोग भूखे हैं उसे महज 30 रुपये में घर जैसा भोजन गणेश प्रसादी के रूप में दिया जा रहा है. इसे लेने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. क्षेत्र में इस प्रसादी की चर्चा भी खूब हो रही है. गणेश पक्ष के दौरान भक्तों की संख्या यहां और भी बढ़ जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
×

Powered by WhatsApp Chat

×